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Computer Monitor | कम्‍प्‍यूटर मॉनिटर:-

जब हमें आउटपुट डाटा स्क्रीन पर देखना होता है। तब हम Computer Monitor अथवा स्क्रीन का उपयोग करते है।

मॉनिटर कम्प्यूटर के आउटपुट डाटा को विजुअल रूप में अर्थात टैक्स्ट, इमेज, वीडियो आदि प्रदर्शित करने का कार्य करता है।

मॉनिटर कई प्रकार के होते है। मॉनिटर को विजुअल डिस्प्ले यूनिट(वी.डी.यू.) तथा वीडियो डिस्प्ले टर्मिनल(वी.डी.टी.) भी कहते है।

डाटा को प्रदर्शित करने के आधार पर मॉनिटर के दो प्रकार है।

मोनोक्रोम डिस्प्ले मॉनिटर | Monocrome Display Monitor टैक्स्ट को दिखाने के लिए केवल एक ही कलर का उपयोग करता है

वहीं कलर डिस्प्ले मॉनिटर | Color Display Monitor टैक्स्ट को 356 कलर में एक साथ दिखा सकता है।

किसी भी मॉनिटर में कोई इमेज बहुत सारे छोटे-छोटे डॉट्स अर्थात पिक्सल से मिलकर बनी होती है।

किसी मॉनिटर पर दिखाई देने वाली इमेज की क्वालिटी तथा क्लेरिटी निम्न तीन बिंदुओं पर निर्भर करती हैः-

A. रिजोल्यूशन ऑफ स्क्रीन | Resolution of Screen:

किसी स्क्रीन पर वर्टीकल एवं हॉरिजोंटल उपलब्ध पिक्सल की संख्या को स्क्रीन का रिजोल्यूशन कहते है।

किसी स्क्रीन पर जितने ज्यादा पिक्सल होते है अर्थात जितने पास-पास पिक्सल होते है,

उसकी इमेज क्वालिटी उतनी ही बेहतर होती है।

B. डॉट पिच | Dot Pitch:-

डॉट पिच से तात्पर्य दो कलर के पिक्सल की एक दूसरे से डॉयगोनल दूरी से है।

किन्ही दो कलर के पिक्सल के बीच की दूरी जितनी कम होगी, इमेज क्वालिटी उतनी ही बेहतर होगी।

C. रिफ्रेश रेट | Refresh Rate:-

रिफ्रेश रेट से तात्पर्य एक सेकेंड में कोई स्क्रीन कितनी बार नई इमेज को डिस्प्ले कर सकती है।

किसी स्क्रीन का रिफ्रेश रेट जितना अधिक होता है, उसकी इमेज क्वालिटी उतनी ही अधिक होती है।

रिफ्रेश रेट को हर्ट्ज में मापा जाता है, जैसे यदि किसी डिस्प्ले का रिफ्रेश रेट 100 हर्ट्ज है, तो वह स्क्रीन एक सेकेंड में 100 इमेज को रिफ्रेश कर सकती है।

अलग-अलग आवश्यकता के लिए मॉनिटर को बनाने के लिए अलग-अलग टैक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।

इन्हीं के आधार पर मॉनिटर निम्न प्रकार के होते है | Type of Computer Monitor:-

1. सी.आर.टी. मॉनिटर | CRT Monitor | Cathode Ray Tube Computer Monitor:-

इसे कैथोड रे ट्यूब भी कहते है। इसमें एक ग्लास का ट्यूब होता है, जो स्क्रीन का कार्य भी करती है,

इसमें इलेक्ट्रॉन किरण के द्वारा स्क्रीन पर इमेज को बनाया जाता है।

इसके लिए ट्यूब के अंदर एक फायर गन लगी होती है,

जिससे इलेक्ट्रॉन किरण निकलती है, जो ट्यूब के अंदर स्क्रीन से टकराती है,

जिससे इमेज स्क्रीन पर दिखाई देती है।

मुख्यतः फायर गन इलेक्ट्रॉन किरण के माध्यम से तीन कलर आर. जी. बी. अर्थात रेड, ग्रीन, ब्लू को जनरेट करती है,

तथा अन्य सभी कलर इन तीनो कलर से ही मिलकर बनता है। इलेक्ट्रॉन किरणो को कैथोड किरणे अथवा कैथोड रे भी कहते है,

इसलिए ही इस मॉनिटर को कैथोड रे ट्यूब मॉनिटर कहते है।

सी.आर.टी. मॉनिटर आकार में बडे होते है, तथा इनका वनज भी अधिक होता है।

वर्तमान में इनका उपयोग बहुत कम किया जाता है।

2. फ्लेट पेनल मॉनिटर | Flat Panel Computer Monitor:

यह मॉनिटर का एडवांस वर्जन है, जिसका आकार तथा वजन सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में बहुत कम होता है। इनकी कीमत अधिक रहती है।

इसमें नुकसानदायक रेडिएशन बहुत कम निकलता है, या तो नहीं निकलता है। यह मॉनिटर दो ग्लास की प्लेटों से मिलकर बने होते है।

वर्तमान में अधिकांश कम्प्यूटर तथा मोबाईल फोन में इसी प्रकार की स्क्रीन का उपयोग होता है।

इस प्रकार के मॉनिटर अलग-अलग स्क्रीन साईज में उपलब्ध होते है।

अलग-अलग टैक्नोलॉजी के आधार पर फ्लेट पेनल मॉनिटर निम्न प्रकार के होते हैः-

3. एल.सी.डी | LCD Monitor | Liquid Crystal Display Computer Monitor:-

इसे लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले कहते है। इसमें दो फ्लेट ग्लास के बीच क्रिस्टल युक्त लिक्विड भरा होता है।

इसमें लिक्विड के क्रिस्टल्स को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि प्रकाश स्क्रीन के पीछे होता है, जिससे स्क्रीन पर इमेज जनरेट होती है।

इसकी इमेज क्वालिटी बहुत अच्छी होती है, साथ ही इससे बहुत कम रेडिएशन निकलती है।

इसमें स्क्रीन बहुत सारे पिक्सल से मिलकर बनी होती है। यह बिजली का कम उपयोग करती है।

अलग-अलग टैक्नोलॉजी के आधार पर एल.सी.डी. दो प्रकार की होती है।

3.1 पैसिव मेट्रिक्स एल.सी.डी. | Passive Metrix LCD:-

इस प्रकार की एल.सी.डी. स्क्रीन में ग्रिड कंडक्टर का उपयोग होता है, जिसमें कंडक्टर वर्टिकल तथा होरीजोन्टल रूप से व्यवस्थित रहते है।

इसमें स्क्रीन के प्रत्येक पिक्सल की लाईट को ग्रिड के वर्टिकल तथा होरीजोन्टल कंडक्टर के इंटरसेक्शन द्वारा कंट्रोल किया जाता है।

3.2 एक्टिव मेट्रिक्स एल.सी.डी. | टी.एफ.टी.(थिन फिल्म ट्रांजिस्टर) एल.सी.डी. | Thin Film Transistor LCD | Active Metrix LCD:-

इस प्रकार की एल.सी.डी. स्क्रीन में टी.एफ.टी. को उपयोग किया जाता है।

इसमें स्क्रीन के प्रत्येक पिक्सल की लाईट को ट्रांजिस्टर द्वारा कंट्रोल किया जाता है।

इसकी पिक्सल को स्वीच अर्थात बंद-चालू करने की गति बहुत अधिक होती है।

4. गैस प्लाज्मा डिस्प्ले | Gas Plasma Display:-

यह भी एक फ्लेट स्क्रीन मॉनिटर है। इसमें दो फ्लेट ग्लास के बीच गैस भरी होती है।

जैसे ही इस स्क्रीन में लाईट प्रवाहित होती है, वैसे ही भरी हुई गेस अल्ट्रावायलेट लाईट निकालती है, जिससे स्क्रीन पर पिक्सल के माध्यम से इमेज प्रदर्शित होती है।

इसकी इमेज क्वालिटी एल.सी.डी. स्क्रीन से अच्छी होती है।

इसकी अधिक कीमत होने के कारण इसका उपयोग कम किया जाता है।

इस प्रकार की स्क्रीन का viewing angle बहुत wide होता है तथा इनका रिफ्रेश रेट भी अधिक होता है।

इसकी कुछ हानियां यह है कि इसमें बिजली की खपत अधिक होती है, उपयोग करते हुए समय के साथ इसकी ब्राइटनेस कम होती जाती है।

5. एल.ई.डी. | LED | Light Emitting Diode Display:-

इसे लाईट एमिटिंग डायोड डिस्प्ले कहते है। इसका वजन कम होता है तथा इसकी स्क्रीन भी फ्लेट होती है। 

इसमें एल.ई.डी. पेनल का उपयोग होता है। इस स्क्रीन में जैसे ही बिजली प्रवाहित की जाती है, तो यह एल.ई.डी., लाईट उत्सर्जित करती है, जिससे स्क्रीन पर इमेज दिखाई देती है। 

पहले एल.ई.डी. केवल रेड लाईट प्रोड्यूस कर सकते थे, लेकिन वर्तमान में एल.ई.डी. के एडवांस वर्जन्स में रेड, ग्रीन तथा ब्लू तीनों कलर साथ ही सफेद कलर की लाईट प्रोड्यूस कर सकते है। 

इसके द्वारा बहुत कम बिजली की खपत की जाती है।

6. ओ.एल.ई.डी | OLED | Organic Light Emitting Diode Display:-

इसे ओर्गेनिक लाईट एमिटिंग डायोड भी कहते है। इसमें एल.ई.डी. का उपयोग किा जाता है, जो ओर्गेनिक मोलीक्यूल्स की मदद से लाईट उत्पन्न करते है। 

ओ.एल.ई.डी. डिस्प्ले में थिन आर्गेनिक फिल्म को दो कंडक्टर के मध्य रखा जाता है। 

ओ.एल.ई.डी. एमिसिव डिस्प्ले बनाते है, जिसमें स्क्रीन का प्रत्येक पिक्सल इनडिविज्वली कंट्रोल किया जाता है। 

इस डिस्प्ले की इमेज क्वालिटी बहुत अच्छी होती है, साथ ही कलर ब्राइट होते है।

7. Touch Screen Monitor:-

कम्‍प्‍यूटर को डाटा तथा निर्देश प्रदान किए जा सकते है तथा साथ ही आउटपुट को स्‍क्रीन पर देखा जा सकता है। टच स्‍क्रीन कम्‍प्‍यूटर मॉनिटर में विभिन्‍न प्रकार की टच स्‍क्रीन टेक्‍नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।

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